प्रेम की चासनी

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प्रेम की चासनी

Postby ganeshjoshi on Wed Mar 17, 2010 6:13 pm

प्रेम की चासनी मई जब तक चुटकी भर अनबन नहीं पड़ती तब तक वह गाढ़ी नहीं होती. जी बी शा
ganeshjoshi
 
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इंतजार

Postby ganeshjoshi on Wed Mar 17, 2010 6:28 pm

इंतजार

तरु की छाव मे बैठी
रमणीक रमणी
मन को मोहित करती
मनोहर अदा
अगना मे बहकती
पवन की मस्ती
सितारों सी चमकती
मन को सुहाती
कल्पना मे सजोती
सुहावने जीवन की स्प्रहा
बाट जोहती तर लोचन से
मीत का इंतजार करती|

काव्य संग्रह 'उम्मीद' से
ganeshjoshi
 
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